हुंकार
अचल स्थिर होने लगा है गर्जन चाहिए
अटल अंशु लाओ चेतना खर्जन चाहिए ।
छुपकर बैठा है साहस उसे आगे बढाओ
रक्त बहाकर अपने प्राण को आगे चढाओ ।
दुश्मन क्रोध दिखा रहा है आग बुझाओ
बरतन से नहीं पानी भी शस्त्रों से चलाओ ।
अनभिज्ञ बांटने लगा है शास्त्र की ज्ञान रोज़
तजुर्बेकार काहाँ छूपा है लाओ बिज्ञान रोज़ ।
देश प्रेम में मत देखो कौन काहाँ और कैसे
कुचल डालो शत्रु को सरहद पे जैसे तैसे ।
तिरंगा लहरायेगा सदा वही सत्य वचन है
राजनेता का मत सुनो हृदय का वो रावण है ।
भगवा लेहरित राम नाम सुबह साम एक नाम
हर घरकी हर जवान हिन्दुस्तान है एक धाम ।।
©Dr Rakesh R Mund







Jai hind
ReplyDeleteJai hind ji
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